15/مارچ 2020
محترم قارئین کرام السلام علیکم
آپ سب کو یہ خبر دیتے ہوے اپنے اندر ایک خوشگوار حلاوت محسوس کررہاہوں کہ اب ہمارے دینی مذہبی ادارے بھی عصری تقاضونکی تکمیل میں آگے آنے لگے ہیں جسکی تازہ مثال مدھوا پور رامپور ضلع مدھوبنی میں واقع الجامعت النبویہ میں منعقد تقسیم الجوائز کاانوکھا پروگرام ہے
اس جامعہ کےبانی ومہتمم حضرت مفتی فیروزالقادری صاحب نے اس پروگرام کو دیگرروایتی پروگرام سےہٹاگر جدید رنگ دیکر نہایت دلچسپ اور مفید سے مفید تر بنادیا
دوسری خصوصیت یہ تھی کہ اسمیں غیر مسلم دانشوروں سیاسی رہنماوں اور پترکاروں کو شامل کرکے ہندو مسلم اتحادکامثبت پیغام بھی دیا جووقت کی اہم ترین ضرورت ہے
پھر اعلی نمبرات لانےوالے طلبہ وطالبات کو خصوصی انعام سے اور باقی جامعہ کے تمام طلبہ وطالبات کو انکی ہمتوں کو مہمیز کرنے کیلیے ایک ایک جیکٹ اور ایک ایک کتاب کاانعام دیا گیا اب آپ سوچ سکتے ہیں کہ اتنا بڑاانعام کہ ایک سو کے قریب جیکٹ اور اتنی ہی کتابوں میں کتنی خطیر رقم لگی ہوگی پھر مندوبین علما جوتقریبا دودرجن تھےاوردیگر معززین جنکی تعداد میرےاندازے کے مطابق دوسو سے متجاوز ہوگی سب کےلیے چاے ناشتہ اور کھانیکا معقول انتطام تھا پھر پروگرام کی حسن ترتیب پہ قربان جائے کہ کم وقتونمیں اس پروگرام نے وہ کام کیا جولاکھوں روپیے کے روایتی جلسوں سے نہیں ہوتا میں توکہونگا کہ روایتی جلسونکارواج ختم کیاجاے یاکم سے کم کیاجاے تاکہ وقت پیسے دونوکی بچت ہو اور قوم مسلم کے اموال اور ان کے جذبات کو صحیح راہ پہ لگایاجاے
ہماری قوم نےاپنے مالونکی بڑی بڑی قربانی دیدی ہے جلسونکے نام پہ اعراس کے نام پہ پیرونکے نام پہ چادرونکے نام پہ مزارات کی تعمیر کے نام پہ مگر قوم کو کیا ملا خداوند قدیر ہماری قوم کو حقیقت آشنا کردے
خلاصہ یہ کہ مفتی فیروزالقادری نے اہل مدارس کیلیے اک مثالی پروگرام دیکر زمام زندگی کو نئ راہ دکھائ ہے خداے بزرگ و برتر انکی عمر اور علم وفضل میں بےشمار برکتیں عطا کرے
قاضی نیپال حضرت علامہ مفتی عثمان برکاتی جنکپور نیپال
दिल की बातें
मोहतरम कारिईन किराम
अस्सलामु अलैकुम व रहमतुल्लाही व बरकातुहु
आप सब को यह खबर देते हुए अपने अन्दर एक खुशगवार हलावत महसूस कर रहा हूं कि अब हमारे *दीनी मजहबी* ईदारे भी असरी तकाजों की तकमील में आगे आने लगे हैं जिसकी ताजा मिसाल मधवापुर रामपुर जिला मधुबनी बिहार में वाके *अल जामियतुन नब्विया* में मुन्अकिद तकसीमुल जवाईज का अनोखा प्रोग्राम है
इस जामिया के बानी व मोहतमीम हजरत हजरत *मुफ्ती फिरोजुल क़ादरी मिस्बाही* साहब ने ईस प्रोग्राम को दिगर रिवायती प्रोग्राम से हटाकर *जदीद रंग* देकर नेहायत दिलचस्प और मुफीद से मुफीद तर बना दिया दुसरी खुसुसियत यह थी कि इसमें गैर *मुस्लिम दानिशवरों सियासी रहनुमाओं और पत्रकारों* को शामिल करके *हिंदु मुस्लिम ईत्तेहाद* का मुसबत पैगाम भी दिया जो वक्त की अहम तरीन जरुरत है
फीर आला नम्बरात लाने वाले तलबा व तालिबात को *खुसुसी ईनाम* और बाकी जामिया के तमाम तलबा व तालिबात को उनकी हिम्मतों को महमीज करने करने के लिए *एक एक जैकेट* और *एक एक ईनाम* दिया गया अब आप सोच सकते हैं के इतना बड़ा ईनाम के *एक सौ* के करीब *जैकेट* और इतनी ही *किताबों* में कितनी खतीर रकम लगी होगी फिर मन्दुबीन ओलमाए किराम जो तकरीबन दो दर्जन थे और दिगर मोअज्जेजीन जिनकी तादाद मेरे अन्दाज़े के मुताबिक दो सौ से मुतजाविज होगी सब के लिए चाय नाश्ता और खाने का माकुल इन्तेजाम था फिर प्रोग्राम की हुस्ने तरतीब पे कूर्बान जाईए के कम वक्तों में इस प्रोग्राम ने वह काम किया जो लाखों रुपये के *रिवायती जलसों* से नहीं होता मैं तो कहुंगा के रिवायती जलसों का रिवाज खत्म किया जाए या कम से कम किया जाए ताकि वक्त पैसे दोनों कि बचत हो और कौमे मुस्लिम के अमवाल और उनके जज्बात को सही राह पे लगाया जाए हमारी कौम ने अपने मालों की बड़ी बड़ी कुर्बानी दे दीं है जलसों के नाम पर आरास के नाम पर पीरों के नाम पर चादरों के नाम पर मजारात की तामीर के नाम पर मगर कौम
को किया मिला
खोदावन्दे कदीर हमारी कौम को हकीकत से आशना करदे।
खुलासा यह के *मुफ्ती फिरोजुल क़ादरी मिस्बाही* ने अहले मदारीस के लिए एक मिसाली प्रोग्राम देकर जमामे जिंदगी को नयी राह दिखाई है खोदाए बुजुर्गों बरतर उनकी उम्र और इल्म व फज्ल में बेशुमार बरकतें अता करे
*बकलम*
हुजुर काजिए नेपाल हजरत अल्लामा मौलाना मुफ्ती मो. उस्मान बरकाती मद्दजिल्लहुल आली (काजी आफ नेपाल)
